पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ करने की तैयारी, विधानसभा में आएगा विधेयक

Kavita2
7 Oct 2026 3:42 PM IST
पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ करने की तैयारी, विधानसभा में आएगा विधेयक
x

कोलकाता। पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ किए जाने की तैयारी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा है कि राज्य सरकार विधानसभा के अगले सत्र में इस संबंध में विधेयक पेश करेगी। उन्होंने साफ कहा कि भविष्य में राज्य के लिए ‘वेस्ट बंगाल’, ‘बांग्ला’ या दूसरे रूपों के बजाय ‘पश्चिम बंग’ नाम का इस्तेमाल करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।

बुधवार को नाम बदलने से जुड़े सवाल पर भट्टाचार्य ने अपने पहले के बयान को दोहराते हुए कहा कि प्रस्तावित नाम ‘पश्चिम बंग’ ही होगा। इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में भी उन्होंने संकेत दिया था कि राज्य सरकार जल्द विधेयक लाने वाली है। उन्होंने कहा था कि यह कदम राज्य की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा हुआ है।

भट्टाचार्य ने बताया कि राज्य का नाम बदलने से संबंधित प्रस्ताव विधानसभा में रखा जाएगा। उनका कहना है कि ‘पश्चिम बंग’ नाम राज्य के इतिहास, विशेषकर विभाजन के बाद बनी उसकी पहचान, को अधिक स्पष्ट रूप से दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेजी समेत सभी भाषाओं में इसी नाम के इस्तेमाल की दिशा में सरकार आगे बढ़ना चाहती है।

राज्य के नाम को लेकर बहस नई नहीं है। पहले की तृणमूल कांग्रेस सरकार भी पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिश कर चुकी है। उस समय ‘बांग्ला’ नाम का प्रस्ताव सामने आया था और विधानसभा ने नाम परिवर्तन के पक्ष में प्रस्ताव भी पारित किया था। हालांकि केंद्र स्तर पर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और नाम आधिकारिक रूप से नहीं बदला।

बीजेपी की मौजूदा पहल पहले के प्रस्ताव से अलग है। पार्टी ‘बांग्ला’ के बजाय ‘पश्चिम बंग’ नाम पर जोर दे रही है। भट्टाचार्य ने तर्क दिया है कि राज्य के नाम में ‘पश्चिम’ शब्द बने रहना उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है और इसे हटाया नहीं जाना चाहिए।

उन्होंने अगस्त में राज्यसभा में भी पश्चिम बंगाल के नाम परिवर्तन की मांग उठाई थी। उस समय केरल का नाम बदलने संबंधी चर्चा के दौरान उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल का नाम भी सभी भाषाओं में ‘पश्चिम बंग’ किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह नाम राज्य के निर्माण और देश विभाजन के इतिहास से जुड़ा है।

अब राज्य सरकार इस दिशा में विधायी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है। किसी राज्य का नाम बदलने के लिए केवल राज्य विधानसभा का प्रस्ताव पर्याप्त नहीं होता। इसके बाद केंद्र स्तर पर संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया पूरी करनी होती है। संबंधित प्रस्ताव संसद तक पहुंचता है और वहां से मंजूरी के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक होती है।

ऐसे में विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद भी नाम परिवर्तन की प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं होगी। राज्य और केंद्र के बीच आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आधिकारिक नाम बदल सकेगा।

बीजेपी नेतृत्व इस प्रस्ताव को सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जोड़कर पेश कर रहा है। शमिक भट्टाचार्य का कहना है कि ‘पश्चिम बंग’ नाम राज्य की ऐतिहासिक वास्तविकता को दर्शाता है और इसी कारण पार्टी इसे औपचारिक नाम बनाने के पक्ष में है।

नाम बदलने का मुद्दा वाराणसी में प्रस्तावित ‘पश्चिम बंग भवन’ के संदर्भ में भी चर्चा में आया। भट्टाचार्य ने बताया था कि वाराणसी में राज्य से जुड़े लोगों के लिए सांस्कृतिक और आवासीय सुविधा विकसित करने की योजना है और इसी संदर्भ में ‘पश्चिम बंग’ नाम को लेकर भी चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित भवन राज्य की संस्कृति और पर्यटन से जुड़ा केंद्र होगा। इसके निर्माण में राज्य के संस्कृति और पर्यटन विभाग के साथ केंद्र तथा कूचबिहार के पूर्व राजपरिवार के वंशजों की भागीदारी की बात भी सामने आई है।

राज्य का नाम बदलने के प्रस्ताव के सामने आने के बाद राजनीतिक बहस भी तेज होने की संभावना है। तृणमूल कांग्रेस पहले ‘बांग्ला’ नाम का समर्थन करती रही है, जबकि बीजेपी ‘पश्चिम बंग’ नाम पर जोर दे रही है। इस कारण दोनों दलों के बीच नाम और पहचान को लेकर राजनीतिक मतभेद स्पष्ट हैं।

बीजेपी का कहना है कि केवल प्रशासनिक सुविधा के आधार पर राज्य का नाम नहीं बदला जाना चाहिए, बल्कि ऐतिहासिक संदर्भ को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। पार्टी के नेताओं का तर्क है कि राज्य की मौजूदा पहचान विभाजन के बाद की ऐतिहासिक परिस्थितियों से जुड़ी हुई है।

दूसरी ओर पहले ‘बांग्ला’ नाम के समर्थकों की दलील रही थी कि इससे राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएगी। हालांकि मौजूदा प्रस्ताव ‘पश्चिम बंग’ को सभी भाषाओं में समान रूप से इस्तेमाल करने की दिशा में है।

नाम बदलने की प्रक्रिया का असर केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है तो सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, प्रशासनिक रिकॉर्ड, रेलवे, डाक व्यवस्था, नक्शों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में भी बदलाव करना पड़ेगा।

इसी तरह केंद्र सरकार की विभिन्न सूचियों और डेटाबेस में भी राज्य के नाम को अपडेट करना होगा। हालांकि ये बदलाव तभी किए जाएंगे जब संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

फिलहाल सबसे पहला कदम विधानसभा में विधेयक पेश करना होगा। शमिक भट्टाचार्य के अनुसार इसे आगामी सत्र में लाया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होगा।

यदि विधानसभा इसे मंजूरी देती है तो आगे केंद्र स्तर की प्रक्रिया शुरू होगी। इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, इसे लेकर अभी कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है।

भट्टाचार्य के बयान के बाद यह लगभग स्पष्ट है कि राज्य सरकार ‘पश्चिम बंग’ नाम को औपचारिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। हालांकि अंतिम निर्णय विधायी और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा।

फिलहाल पश्चिम बंगाल के नाम परिवर्तन का मुद्दा एक बार फिर राज्य की राजनीति और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। अब सबकी नजर विधानसभा के अगले सत्र पर रहेगी, जहां ‘पश्चिम बंग’ नाम से संबंधित विधेयक पेश किए जाने की बात कही गई है।

Next Story